तिल्दा नेवरा: राजधानी रायपुर के तिल्दा नेवरा शहर में इन दिनों कानून व्यवस्था पूरी तरह पटरी से उतर चुकी है. लगातार हो रही आपराधिक वारदातों और पुलिस प्रशासन की ढीली कार्रवाई ने स्थानीय जनता के सब्र का बांध तोड़ दिया है. नागरिकों का आरोप है कि पुलिस केवल प्रतिबंधात्मक धाराओं (जैसे धारा 151) और आर्म्स एक्ट के छोटे मामलों की विज्ञप्ति जारी कर अपनी पीठ थपथपा रही है, जबकि बड़े अपराधी बेखौफ घूम रहे हैं.स्थानीय लोगों ने तंज कसते हुए कहा, “अगर पुलिस की कागजी कार्रवाई से हमारा शहर सचमुच अपराध मुक्त हो गया है, तो प्रशासन और जनता दोनों को इसकी हार्दिक बधाई!”
संयोग या मनगढ़ंत थ्योरी? एक ही ओवरब्रिज से बार-बार गिरफ्तारी!जनता के बीच सबसे बड़ा कौतूहल और संदेह पुलिस की गिरफ्तारी की लोकेशन को लेकर है. नेवरा पुलिस हर बड़े या संदिग्ध मामले में आरोपियों की गिरफ्तारी सासाहोली ओवरब्रिज से ही दिखाती है.
जनता का सवाल क्या सच में पूरे क्षेत्र के सारे अपराधी इसी एक ब्रिज पर आकर पुलिस का इंतजार करते हैं?
संदेह का कारण एक ही जगह से बार-बार गिरफ्तारी दिखाना महज कोई इत्तेफाक है या फिर पुलिस अपनी नाकामी छुपाने के लिए बनी-बनाई कहानी (स्क्रिप्ट) पेश कर रही है?
नशे का काला कारोबार पुलिस अनजान या मेहरबान?शहर की गलियों में प्रतिबंधित नशीली गोलियां, सिरप और सूखा नशा (गांजा) धड़ल्ले से बिक रहा है. इसकी जद में आकर स्कूली बच्चे और युवा अपना भविष्य बर्बाद कर रहे हैं.
दिखावे की कार्रवाई करीब एक महीने पहले नेवरा पुलिस ने नशे का कारोबार करने वाली एक महिला को गिरफ्तार कर जेल भेजा था
कार्रवाई के बाद का सच इस दिखावे की कार्रवाई के बाद जमीनी स्तर पर कोई सुधार नहीं हुआ. अवैध नशे का यह काला धंधा बंद होने के बजाय अब दोगुनी रफ्तार से फल-फूल रहा है.
बेखौफ घूम रहे आरोपी, पुलिस की मेहरबानी पर उठे सवाल स्थानीय नागरिकों में इस बात को लेकर भी भारी नाराजगी है कि जिन लोगों पर मामले दर्ज हैं या जो असामाजिक गतिविधियों में शामिल हैं, वे बेफिक्र होकर शहर में घूम रहे हैं. कुछ आरोपी तो बेखौफ होकर दूसरे शहरों में सैर-सपाटा कर रहे हैं. जनता सीधे तौर पर पूछ रही है कि “तिल्दा नेवरा पुलिस इन अपराधियों पर इतनी मेहरबान क्यों है?”क्या रायपुर जिला पुलिस प्रशासन और आला अधिकारी इस बढ़ते काले कारोबार और स्थानीय पुलिस की संदिग्ध भूमिका पर संज्ञान लेंगे, या जनता इसी तरह खौफ और आक्रोश के साये में जीने को मजबूर रहेगी?






