रायपुर: छत्तीसगढ़ शिक्षा विभाग में वर्षों से चल रहे ‘संलग्नीकरण उद्योग’ (अटैचमेंट) का एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। 1 जुलाई से लागू हुई ‘लोकेशन आधारित ऑनलाइन उपस्थिति’ व्यवस्था ने इस पूरे खेल की पोल खोल कर रख दी है। प्रदेश के करीब 10,000 शिक्षक, बाबू और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी अपनी मूल पदस्थापना वाले स्कूलों को छोड़कर दूसरे विभागों में मजे से काम कर रहे हैं।
अटैचमेंट का खेल हुआ खत्म: शिक्षा विभाग ने कड़े निर्देश जारी किए हैं कि जो कर्मचारी जहां पदस्थ है, वहीं से उसकी ऑनलाइन हाजिरी लगेगी। ऐसा न करने पर वेतन रोक दिया जाएगा।
शिक्षकों की अजीबोगरीब ड्यूटी: जांच में सामने आया है कि कई शिक्षक (गुरुजी) स्कूलों में पढ़ाने के बजाय कलेक्ट्रेट और तहसील कार्यालयों में जन्म प्रमाण पत्र बना रहे हैं, बाढ़ नियंत्रण कक्ष में तैनात हैं, तो कुछ पंचायत कार्यालयों में बाबू का काम संभाल रहे हैं।
नेताओं के ‘पीए’ बने गुरुजी: बिलासपुर जिले में 57 शिक्षकों के अटैचमेंट की सूची जारी हुई है, जिसमें कुछ शिक्षक अपनी ऊंची पहुंच (जुगाड़) के दम पर विधायकों के निजी स्टाफ (PA) तक बन बैठे हैं।
कलेक्टर ने मांगी विशेष छूट: कोंडागांव से एक हैरान करने वाला मामला आया है, जहां खुद कलेक्टर ने शिक्षा विभाग के बड़े अफसरों को पत्र लिखकर कर्मचारियों की कमी का हवाला दिया है और अवैध रूप से अटैच इन कर्मचारियों को वहीं काम करने देने की विशेष छूट मांगी है।
शासन का सख्त रुख:स्कूल शिक्षा सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह ने साफ कर दिया है कि राज्य शासन के सभी निर्देशों का कड़ाई से पालन किया जा रहा है। स्कूलों में भर्ती कर्मचारियों का दूसरी जगहों पर अटैचमेंट बिल्कुल भी सही नहीं है, क्योंकि इससे स्कूलों की पढ़ाई और प्रशासनिक व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित होती है। अब स्पष्ट आदेश है—”अटैचमेंट खत्म होगा, वरना तनख्वाह नहीं मिलेगी।”






