तिल्दा नेवरा: छत्तीसगढ़ प्रदेश में कार्यरत लाखों शिक्षक संवर्ग के हितों को ध्यान में रखकर श्री जितेंद्र कुमार वर्मा व्याख्याता ने छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा शिक्षक संवर्ग के संविलियन तिथि 1 जुलाई 2018 से पूर्व की सेवा को आधार मानकर प्रदेश के लाखों(एल बी संवर्ग)शिक्षकों के भविष्य को सुरक्षित करने की मांग की है। श्री जितेंद्र वर्मा ने शासन से मांग की है कि माननीय उच्च न्यायालय बिलासपुर के हाल ही में दिए गए ऐतिहासिक फैसलों का हवाला देते हुए संविलीयन से पूर्व की सेवा अवधि को जोड़कर पूर्ण पेंशन निर्धारित करने हेतु नीति बनाई जाए। उन्होंने बताया कि हजारों शिक्षक शिक्षिकाओं जिन्होंने शिक्षाकर्मी/ पंचायत संवर्ग के रूप में अपनी सेवा दशकों तक दिए हैं उन्हें पूर्ण पेंशन का लाभ दिया जाए। शिक्षक संवर्ग की प्रथम नियुक्ति से शिक्षाकर्मी/ पंचायत संवर्ग की गणना किया जाए। ताकि 10 वर्षों की “अर्हक सेवा” की तकनीकी बाधा दूर हो सके। केवल 2018 के बाद से सेवाओं को गिनना न्याय संगत नहीं माना जा सकता। सरकार ने संविलियन और सातवें वेतनमान की उदारता पूर्वक ऐतिहासिक निर्णय लिए इस संवेदनशीलता के साथ शिक्षकों को पूर्ण पेंशन देने के लिए आदेश जारी किया जाना चाहिए। श्री जितेंद्र वर्मा ने आगे बताया कि इससे सरकार को आर्थिक बोझ नहीं पड़ेगा क्योंकि प्रदेश के लगभग डेढ़ लाख एल बी संवर्ग के शिक्षक हैं। उसमें क्रमिक रूप से लगभग 2हजार से 3हजार शिक्षक ही प्रतिवर्ष सेवा निवृत होंगे। इस क्रमिक प्रवाह के कारण राज्य शासन पर एक मुक्त वित्तीय भार भी नहीं पड़ेगा।क्योंकि सेवानिवृत्ति विभिन्न चरणों में होने से बजट पर भी इसका आर्थिक प्रभाव नहीं पड़ेगा। अतः शासन इस ध्यान आकृष्ट कर लाखों शिक्षक संवर्ग के हितों को ध्यान में रखते हुए संविलियन पूर्व सेवा के आधार पर पेंशन निर्धारित करने का कष्ट करें।






