हिरमी रावन: भाई-बहन के अटूट प्रेम, स्नेह और विश्वास का पावन पर्व रक्षाबंधन शुक्रवार को हिरमी अंचल सहित मोहरा, बरडीह, कुथरौद एवं सकलोर में पारंपरिक रीति-रिवाज और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया।सुबह से ही गांवों में रक्षाबंधन को लेकर उत्साह का माहौल रहा। बहनों ने पूजा की थाली सजाकर भाइयों की आरती उतारी, माथे पर तिलक लगाया और कलाई पर रक्षा सूत्र बांधकर उनके सुख, समृद्धि, स्वास्थ्य एवं दीर्घायु की कामना की।वहीं भाइयों ने भी बहनों को उपहार भेंट कर जीवनभर उनकी रक्षा, सम्मान और हर सुख-दुख में साथ देने का संकल्प लिया। दूर-दराज में रहने वाले भाई-बहन भी पर्व मनाने अपने गांव और घर पहुंचे, जिससे परिवारों में विशेष चहल-पहल देखने को मिली।ग्रामीण संस्कृति में आज भी जीवंत है राखी की परंपराछत्तीसगढ़ के ग्रामीण अंचलों में रक्षाबंधन केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि परिवार और रिश्तों को जोड़ने वाली आत्मीय परंपरा है। बहन का मायके आना, भाई की कलाई पर राखी बांधना और परिवार के बुजुर्गों से आशीर्वाद लेना आज भी इस पर्व की खास पहचान है।सावन की हरियाली, गांव की मिट्टी की खुशबू और पारंपरिक पकवानों के बीच मनाया गया रक्षाबंधन भाई-बहन के रिश्ते में प्रेम और मिठास घोल गया।राखी का धागा सिर्फ कलाई पर नहीं बंधता, बल्कि यह भाई-बहन के बीच प्रेम, विश्वास, जिम्मेदारी और जीवनभर साथ निभाने के संकल्प को मजबूत करता है।







