तिल्दा-नेवरा: ग्राम पंचायत तुलसी में प्रस्तावित 31 दुकानों के निर्माण और आवंटन को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। पंचायत क्षेत्र में यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। ग्रामीणों के बीच व्यंग्यात्मक अंदाज में एक ही बात कही जा रही है—”टीवी चाहे 32 इंच का हो या 36 इंच का, उसे चलाता रिमोट ही है।” इसी तरह लोग सवाल उठा रहे हैं कि पंचायत के इस पूरे मामले में आखिर ‘रिमोट’ किसके हाथ में है? निर्णय कौन ले रहा है और पर्दे के पीछे किसके इशारे पर पूरी प्रक्रिया संचालित हो रही है?स्थानीय स्तर पर कई तरह के आरोप और चर्चाएं सामने आ रही हैं। कुछ लोगों का दावा है कि करीब ₹2 लाख की रसीद काटे जाने की बात सामने आई है, जबकि क्षेत्र में यह चर्चा है कि एक-एक दुकान की कीमत लगभग ₹11 से ₹13 लाख तक आंकी जा रही है। यदि इन दावों में सच्चाई है, तो रसीद में दर्शाई गई राशि और कथित वास्तविक मूल्य के बीच इतना बड़ा अंतर क्यों है? यह सवाल लोगों के मन में लगातार उठ रहा है।ग्रामीणों का कहना है कि यदि दुकानों के आवंटन और निर्माण प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता बरती गई है, तो सभी दस्तावेज सार्वजनिक किए जाएं ताकि स्थिति स्पष्ट हो सके। वहीं यदि कहीं कोई अनियमितता हुई है, तो उसकी निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की जानी चाहिए।इसी बीच यह भी चर्चा है कि कैबिनेट मंत्री गुरु खुशवंत साहब द्वारा इस पूरे मामले की जांच के लिए कलेक्टर को पत्र लिखा गया है। यदि मंत्री स्तर से पत्र भेजे जाने के बाद भी जांच या कार्रवाई आगे नहीं बढ़ती है, तो यह प्रशासनिक व्यवस्था पर भी कई सवाल खड़े करेगा।अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आखिर यह कथित बंदरबांट किसके संरक्षण में हुई? किसे इसका लाभ मिला? और पंचायत का ‘रिमोट’ आखिर किसके हाथ में है? इन सवालों के जवाब केवल निष्पक्ष जांच और आधिकारिक तथ्यों से ही सामने आ सकते हैं।फिलहाल पूरे क्षेत्र की निगाहें जिला प्रशासन पर टिकी हुई हैं। देखने वाली बात होगी कि मंत्री के पत्र के बाद प्रशासन क्या कदम उठाता है और 31 दुकानों के मामले में उठ रहे सवालों का जवाब कब तक सामने आता है।







