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भ्रष्टाचार पर कार्रवाई न होने से आक्रोश, ग्राम पंचायत देवरी में 5 अगस्त से अनिश्चितकालीन तालाबंदी का ऐलान!

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प्रशासनिक निष्क्रियता के खिलाफ ग्रामीणों का फूटा गुस्सा, सौंपे गए ज्ञापन में दी गई उग्र आंदोलन की चेतावनी

रायपुर (तल्दा-नेवरा):छत्तीसगढ़ के जिला रायपुर अंतर्गत तल्दा-नेवरा क्षेत्र की ग्राम पंचायत देवरी में एक बड़ा प्रशासनिक और सामाजिक गतिरोध पैदा हो गया है। ग्राम पंचायत देवरी के उपसरपंच, पंचगणों और आक्रोशित ग्रामीणों ने एकजुट होकर प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। जांच रिपोर्ट में भ्रष्टाचार साबित होने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई न किए जाने के विरोध में ग्रामीणों ने आगामी 5 अगस्त 2026 से ग्राम पंचायत भवन के मुख्य द्वार पर ‘अनिश्चितकालीन तालाबंदी’ (Lockout) और शांतिपूर्ण धरना प्रदर्शन करने का आधिकारिक निर्णय लिया है।इस संबंध में ग्रामीणों द्वारा अनुविभागीय दण्डाधिकारी (SDM), मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) जनपद पंचायत तल्दा, और थाना प्रभारी तल्दा-नेवरा को एक लिखित पूर्व सूचना पत्र सौंपा गया है।

मुख्य मुद्दे और ग्रामीणों के गंभीर आरोप:घोर प्रशासनिक उदासीनता: ग्रामीणों का आरोप है कि वर्तमान सरपंच श्रीमती दिव्या (राजा) वर्मा और तत्कालीन सचिव श्री तेजराम वर्मा के विरुद्ध कूटरचना, शासकीय रजिस्टर फाड़ने और मेसर्स अग्रसेन स्टील एंड पावर प्राइवेट लिमिटेड को फर्जी NOC देने के मामले में जांच पूरी हो चुकी है। संयुक्त आधिकारिक जांच प्रतिवेदन (क्रमांक 2884/26, दिनांक 08/07/2026) में अधिकारियों ने स्वयं इन्हें दोषी माना है, फिर भी आज तक न तो FIR दर्ज की गई और न ही सरपंच को निलंबित किया गया।साक्ष्यों से छेड़छाड़ की आशंका: दोषियों के अभी भी अपने पदों पर बने रहने के कारण वे खुलेआम घूम रहे हैं। ग्रामीणों को डर है कि वे पंचायत के बचे हुए रिकॉर्ड खुर्द-बुर्द कर सकते हैं और गवाहों (पंचों) को डराने-धमकाने का प्रयास कर रहे हैं। प्रशासन के इस मौन को ग्रामीण अपराधियों को संरक्षण देने जैसा मान रहे हैं।कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी प्रशासन की: ग्रामीणों ने पत्र में स्पष्ट किया है कि 5 अगस्त से होने वाली तालाबंदी और धरने के दौरान यदि कानून-व्यवस्था (Law & Order) की कोई भी स्थिति निर्मित होती है, तो इसकी संपूर्ण जिम्मेदारी पूर्ण रूप से स्थानीय प्रशासन (SDM, जनपद CEO) और पुलिस प्रशासन की होगी।

ग्रामीणों की अंतिम मांगग्रामीणों ने प्रशासन से पुरजोर मांग की है कि तालाबंदी की प्रस्तावित तिथि (5 अगस्त) से पहले दोषी सरपंच और सचिव के विरुद्ध तत्काल नामजद FIR दर्ज की जाए और उन्हें उनके पदों से निलंबित किया जाए। यदि ऐसा नहीं होता है, तो ग्रामीण उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।

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