तिल्दा-नेवरा: नगर पालिका परिषद तिल्दा-नेवरा एक बार फिर कथित भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर चर्चा में है। इस बार मामला नामांतरण (नामांकन) प्रक्रिया से जुड़ा है, जहां एक पीड़ित ने आरोप लगाया है कि उसके कार्य के एवज में पहले 5 प्रतिशत राशि के नाम पर लगभग 80 हजार रुपये की मांग की गई। बाद में कथित तौर पर यह राशि घटाकर 60 हजार रुपये करने की बात कही गई।पीड़ित के अनुसार, जब वह अपने नामांतरण संबंधी कार्य के लिए नगर पालिका पहुंचा, तब उसे बताया गया कि कार्य कराने के लिए 5 प्रतिशत राशि देनी होगी। आरोप है कि यह मांग नगर के एक चर्चित व्यक्ति की ओर से की गई। इसके बाद पीड़ित ने एक पार्षद से संपर्क किया, इस उम्मीद में कि बिना अनावश्यक राशि दिए उसका कार्य हो जाएगा। लेकिन वहां भी कथित तौर पर अंतिम रूप से 60 हजार रुपये देने की मांग की गई।बताया जाता है कि रिश्वत की मांग से परेशान होकर पीड़ित ने सीधे मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) शर्मा से मुलाकात कर पूरी जानकारी दी। शिकायत सुनने के बाद सीएमओ ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल संबंधित कर्मचारियों को बुलाया और फटकार लगाई। इसके बाद बिना किसी अतिरिक्त राशि के पीड़ित का नामांतरण संबंधी कार्य पूरा कराया गया।सूत्रों के अनुसार, जब सीएमओ ने नगर पालिका अध्यक्ष के पति और संबंधित पार्षद से इस संबंध में चर्चा की, तब कथित रूप से यह कहा गया कि “5 प्रतिशत लेने का प्रस्ताव पारित है।” इस पर सीएमओ शर्मा ने उनसे उक्त प्रस्ताव की प्रति प्रस्तुत करने को कहा। हालांकि, आरोप है कि कोई वैध प्रस्ताव प्रस्तुत नहीं किया जा सका और संबंधित लोग बात को टालते हुए वहां से चले गए।नगर में इस घटना की चर्चा जोरों पर है। लोगों का कहना है कि यदि नामांतरण जैसे नियमित शासकीय कार्यों में भी इस प्रकार की राशि मांगी जाती है, तो यह आम नागरिकों के लिए गंभीर चिंता का विषय है। नागरिकों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की मांग की है।स्थानीय लोगों का कहना है कि सीएमओ शर्मा के पदभार संभालने के बाद नगर पालिका में कार्यप्रणाली में सुधार देखने को मिला है। शहर की साफ-सफाई व्यवस्था में भी पहले की अपेक्षा बेहतर स्थिति दिखाई दे रही है तथा कई कार्य समय पर होने लगे हैं। इसके बावजूद यदि कुछ लोग कथित रूप से अवैध वसूली की कोशिश कर रहे हैं, तो इससे नगर पालिका की छवि धूमिल हो रही है।






