हिरमी: छत्तीसगढ़ के पहले त्योहार ‘हरेली’ को हिरमी अंचल एवं आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में पूरे हर्षाउल्लास, उत्साह और परंपरा के साथ मनाया गया। खेती-किसानी का शुरुआती कार्य पूर्ण करने के बाद किसान भाइयों ने अपनी खुशी प्रकट करते हुए लोक संस्कृति के इस महान पर्व का आनंद लिया। कृषि औजारों की सफाई और पूजा-अर्चना हरेली पर्व के अवसर पर किसानों ने अपने हल, कुदाली, नागर, रापा सहित सभी कृषि यंत्रों को धोकर साफ-सुथरा किया। इसके पश्चात विधि-विधान से धूप-दीप जलाकर उनकी पूजा-अर्चना की गई और विशेष रूप से तैयार स्वादिष्ट चीला रोटी का भोग लगाया गया। किसानों ने अच्छी फसल और गांव में खुशहाली की कामना की। गोठान में पशुधन की सुरक्षा हेतु बांटी गई औषधि छत्तीसगढ़ी परंपरा के अनुसार, पशुधन के स्वास्थ्य और सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए गोठान में विशेष व्यवस्था की गई। पशुओं को बीमारियों से बचाने के लिए गेहूं की लोई और खमार पत्ते में नमक मिलाकर जड़ी-बूटी (औषधि) खिलाई गई, जिससे उनकी सेहत उत्तम रहे और वे सुरक्षित रहें। दिलेश्वर मढरिया ने दी हरेली की शुभकामनाएं क्षेत्र के किसान दिलेश्वर मढरिया ने हरेली त्यौहार के सांस्कृतिक महत्व पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए बताया कि यह पर्व प्रकृति, कृषि और पशुधन के प्रति हमारी कृतज्ञता व्यक्त करने का सबसे सुंदर माध्यम है। यह त्योहार हमारी छत्तीसगढ़ी माटी की पहचान और समृद्ध संस्कृति का प्रतीक है। उन्होंने अंचलवासियों एवं प्रदेश के सभी किसान भाइयों को हरेली पर्व की बधाई व ढेरों शुभकामनाएं दीं। दिनभर गांवों में गेड़ी चढ़ने और पारंपरिक खेल-कूद का दौर जारी रहा, जिससे पूरा अंचल छत्तीसगढ़ी संस्कृति के रंगों में सराबोर नजर आया।







