छत्तीसगढ़: हेडमास्टर फेडरेशन के प्रदेश अध्यक्ष कमलेश सिंह बिसेन ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बालोद जिला में कलेक्टर द्वारा खराब परीक्षा परिणाम के नाम पर प्राचार्यो को निलंबित करने व एक वेतन वृद्धि रोकने के तुगलकी फरमान का विरोध किया है।बालोद जिला कलेक्टर द्वारा दसवी एवम बारहवी कक्षा के परीक्षा परिणाम की समीक्षा करते हुवे कथित रूप से खराब परिणाम देने वाले हायर सेकेंडरी के प्राचार्यो पर बिना नोटिस दिए अधिकार क्षेत्र के बाहर जाकर निलंबन की कार्रवाई प्रदेश में निरंकुश हो चुके अफसरशाही का प्रमाण है।पिछले वर्ष अच्छा परिणाम देने वाले शालाओं में इस बार कुछ कम प्रतिशत में परिणाम आया जिसे समीक्षा कर सुधार करने की बजाय कलेक्टर ने सीधे निलंबन का आदेश जारी कर दिया।प्राचार्य संवर्ग द्वितीय श्रेणी राजपत्रित अधिकारी होता है जिस पर कार्रवाई का अधिकार केवल लोक शिक्षा संचालक और शिक्षा सचिव को है।जिला शिक्षा अधिकारी या कलेक्टर उच्च कार्यालय को केवल अनुशंसा भेज सकता है।लेकिन निरंकुश हो चुका अफसर तंत्र को यह भी नहीं मालूम की उसका दायरा क्या है?प्रदेश अध्यक्ष कमलेश सिंह बिसेन का कहना है की शाला का परीक्षा परिणाम केवल प्राचार्य की जवाबदेही नही है बल्कि पर्याप्त शैक्षणिक स्टॉफ,शैक्षणिक वातावरण का निर्माण,गैर शिक्षकीय कार्य पर लगाम,विद्यार्थियों और पालकों की जागरूकता और सहयोग इन कारकों पर भी निर्भर करती है।लेकिन बालोद कलेक्टर ने बाकी सभी तथ्यों को नजरंदाज कर दो तीन महीने पहले प्राचार्यो को सीधे उत्तरदाई ठहराकर कार्रवाई करना कही से भी तर्कसंगत नहीं लगता।छत्तीसगढ़ हेडमास्टर फेडरेशन बालोद कलेक्टर द्वारा नियम विरुद्ध किए कार्रवाई की कड़ी निंदा करता है तथा माननीय शिक्षा मंत्री जी से निवेदन करता है की तत्काल इस विषय पर संज्ञान लेकर पीड़ित प्राचार्यो पर संस्थित कार्रवाई को शुन्य घोषित करे।हेडमास्टर फेडरेशन प्रदेश के सभी प्राचार्य साथियों को आश्वासन भी जारी करता है की आपकी लड़ाई में हर प्रधानपाठक आपके साथ खड़ा है।प्रदेश को अधिकारियों के जंगलराज नही बनने दिया जायेगा।किसी भी प्राचार्य,प्रधानपाठक या आम शिक्षक के साथ अन्याय होगा तो हमारा संगठन पुरजोर विरोध करेगा।







