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ज्ञानोदय स्कूल में फाग गीतों की गूंज: फूलों की होली से दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश

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हिरमी-रावन: स्थानीय ज्ञानोदय स्कूल हिरमी में ‘होली मिलन समारोह’ हर्षोल्लास और पारंपरिक गरिमा के साथ मनाया गया। इस दौरान पूरा स्कूल परिसर अबीर-गुलाल के रंगों और फाग गीतों की मधुर गूंज से सराबोर रहा। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण ‘ईको-फ्रेंडली होली’ रही, जिसके माध्यम से विद्यार्थियों को प्रकृति प्रेम का संदेश दिया गया। नगाड़ों की थाप पर थिरके छात्र और शिक्षक उत्सव का आगाज़ पारंपरिक नगाड़ों की थाप और ढोल-मंजीरों के साथ हुआ। जैसे ही शिक्षकों ने पारंपरिक फाग गीत शुरू किए, छात्र-छात्राएं खुद को रोक नहीं पाए और जमकर थिरके। हवा में उड़ते गुलाल और बच्चों के उत्साह ने पूरे वातावरण को सतरंगी बना दिया। पुरानी परंपराओं को जीवंत करते इन गीतों ने आधुनिकता के दौर में लोक संस्कृति की महत्ता को फिर से स्थापित किया। पानी बचाएं, प्रकृति सजाएं स्कूल के प्राचार्य पी. आर. वर्मा ने सभी को होली की शुभकामनाएं देते हुए पर्यावरण संरक्षण की शपथ दिलाई। उन्होंने कहा होली केवल रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि प्रेम और सद्भाव का संगम है। वर्तमान में जल संकट को देखते हुए हमें अपनी खुशियों के लिए पानी बर्बाद करने का हक नहीं है। फूलों की होली खेलकर हम न केवल अपनी परंपरा का सम्मान करते हैं, बल्कि पर्यावरण को भी सुरक्षित रखते हैं। बच्चों ने प्राचार्य की बात का मान रखते हुए एक-दूसरे पर फूलों की पंखुड़ियां बरसाईं और ‘सूखी होली’ खेलने का संकल्प लिया। होली बुराई पर अच्छाई की जीत की शाश्वत कथा इस अवसर पर शिक्षकों ने बच्चों को होली के पीछे की पौराणिक कथा भी सुनाई। यह पर्व भक्त प्रहलाद और उनकी अटूट श्रद्धा की याद दिलाता है। असुर राज हिरण्यकश्यप ने अपने ही पुत्र प्रहलाद को मारने के लिए अपनी बहन होलिका की गोद में आग में बिठा दिया था। होलिका को वरदान था कि वह आग में नहीं जलेगी, लेकिन अधर्म का साथ देने के कारण होलिका भस्म हो गई और भगवान की कृपा से भक्त प्रहलाद सुरक्षित बच निकले। होली पर्व से मिलने वाली प्रेरणा होली का त्योहार हमें जीवन में तीन मुख्य प्रेरणाएं देता है अधर्म पर धर्म की विजय यह हमें सिखाता है कि सत्य कितना भी कठिन क्यों न हो, जीत हमेशा उसी की होती है। गुलाल लगने के बाद हर चेहरा एक जैसा दिखता है, जो यह संदेश देता है कि जाति-पाति और भेदभाव छोड़कर हमें गले मिलना चाहिए। पुरानी कड़वाहट को भुलाकर रिश्तों में नए रंग भरने का यह सबसे श्रेष्ठ समय है। ज्ञानोदय स्कूल का यह आयोजन शिक्षा और संस्कार का अनूठा उदाहरण रहा। अंत में सभी ने एक-दूसरे को गले लगाकर सुख-समृद्धि की कामना की।

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