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खानापूर्ति की कार्रवाई या सेटिंग का खेल? तिल्दा में अवैध ईंट कारोबार पर उठे सवाल”

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तिल्दा-नेवरा: तिल्दा-नेवरा पुलिस एवं राजस्व विभाग द्वारा ग्राम अलदा में लगभग एक लाख ईंट जब्त किए जाने की कार्रवाई अब सवालों के घेरे में आ गई है। प्रशासन ने इसे अवैध भंडारण के खिलाफ बड़ी कार्रवाई बताकर अपनी पीठ थपथपाने की कोशिश की, लेकिन क्षेत्र के लोगों और अन्य ईंट कारोबारियों के बीच चर्चा है कि यह केवल “खानापूर्ति कार्रवाई” बनकर रह गई है।ग्रामीणों का कहना है कि तिल्दा-नेवरा एवं आसपास के क्षेत्रों में कई ईंट भट्ठे वर्षों से संचालित हो रहे हैं, जहां बड़े पैमाने पर मिट्टी उत्खनन, ईंट निर्माण और भंडारण किया जाता है। यदि नियमों का सख्ती से पालन कराया जाए तो अनेक भट्ठों की जांच आवश्यक हो जाती है। ऐसे में केवल एक व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई कर प्रशासन आखिर क्या संदेश देना चाहता है, यह बड़ा सवाल बन गया है।सूत्रों के अनुसार क्षेत्र में कई ऐसे ईंट भट्ठे संचालित हैं जिनके पास पर्यावरणीय अनुमति, राजस्व दस्तावेज और भंडारण संबंधी नियमों की स्थिति स्पष्ट नहीं है। इसके बावजूद उन पर कोई कार्रवाई नहीं होना प्रशासन की निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर रहा है। लोगों का आरोप है कि कुछ प्रभावशाली संचालकों पर अधिकारियों की विशेष कृपा बनी हुई है, जबकि छोटे कारोबारियों पर दबाव बनाकर कार्रवाई का दिखावा किया जा रहा है।स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि प्रशासन वास्तव में अवैध ईंट कारोबार के खिलाफ गंभीर है, तो पूरे क्षेत्र में व्यापक जांच अभियान चलाया जाना चाहिए। केवल एक स्थान पर छापामार कार्रवाई कर मीडिया में सुर्खियां बटोरना और खुद को सख्त अधिकारी साबित करने का प्रयास जनता की नजरों में “दिखावटी कार्रवाई” माना जा रहा है।ग्रामीणों ने मांग की है कि तिल्दा-नेवरा क्षेत्र के सभी ईंट भट्ठों की निष्पक्ष जांच कर यह सार्वजनिक किया जाए कि किन-किन भट्ठों के पास वैध अनुमति और दस्तावेज हैं। साथ ही अवैध उत्खनन और नियमों के उल्लंघन पर समान रूप से कार्रवाई की जाए, ताकि प्रशासन की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवालों का जवाब मिल सके।

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