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जांच में दोषी ठहराए जाने के बाद भी ₹45 लाख के FD घोटाले के आरोपी भरत साहू पर मेहरबान विभाग, खरोरा में अब भी संभाल रहे बैंक की कमान

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रायपुर/तिल्दा: सहकारी समितियों में किसानों के नाम पर जमा फिक्स डिपॉजिट को नियमों के खिलाफ तोड़कर लाखों रुपये के गबन का मामला एक बार फिर गरमा गया है। सुशासन तिहार के तहत तिल्दा विकासखंड की ग्राम पंचायत कनकी में 22 मई को आयोजित शिविर में ग्रामीणों ने इस वर्षों पुराने मामले को फिर उठाया। आरोप है कि सहकारिता विभाग की जांच में दोषी करार दिए जाने और उप आयुक्त द्वारा कार्रवाई के स्पष्ट आदेश के बावजूद मुख्य आरोपी तत्कालीन समिति प्रबंधक भरत लाल साहू समेत पूरे संचालक मंडल पर आज तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।इस पूरे प्रकरण की शुरुआत 16 जून 2025 को जिला पंचायत रायपुर की साधारण सभा की बैठक से हुई थी। बैठक में कनकी, खरोरा और बेल्दारसिवनी स्थित प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों के वित्तीय कार्यों में भारी गड़बड़ी का मुद्दा सदस्यों ने जोर-शोर से उठाया। मामले की गंभीरता को देखते हुए उप पंजीयक सहकारी संस्थाएं रायपुर ने तत्काल जांच के आदेश जारी किए और जांच की जिम्मेदारी सहकारिता विस्तार अधिकारी तिल्दा शशांक बल्लेवार को सौंपी गई। जांच में जो तथ्य सामने आए वे बेहद चौंकाने वाले थे। जांच प्रतिवेदन के अनुसार समिति कनकी में वर्ष 2015 के दौरान कुल चालीस लाख इकसठ हजार दो सौ पांच रुपये की फिक्स डिपॉजिट को समय से पहले तुड़वाकर निकाल लिया गया। इसी प्रकार समिति बुडेनी में वर्ष 2019 में पांच लाख रुपये की FD को पहले बचत खाते में स्थानांतरित किया गया और फिर वहां से पूरी राशि आहरित कर ली गई। जांच में सबसे गंभीर पहलू यह सामने आया कि इन दोनों ही मामलों में FD तोड़ने से पहले कार्यालय उप पंजीयक से अनिवार्य अनुमोदन तक नहीं लिया गया था। सहकारिता नियमों के तहत इतनी बड़ी राशि निकालने के लिए पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य होता है। इससे भी ज्यादा चिंताजनक बात यह रही कि जांच अधिकारी को निकाली गई राशि के खर्च का कोई हिसाब नहीं मिला। समितियों की ओर से यह बताने के लिए एक भी वाउचर या दस्तावेज पेश नहीं किया जा सका कि आखिर यह पैसा किस मद में और कहां खर्च किया गया।जांच रिपोर्ट में इस पूरे गबन के लिए चार पक्षों को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया गया है। रिपोर्ट में सबसे ऊपर नाम तत्कालीन समिति प्रबंधक भरत लाल साहू का है जो जांच अवधि में दोनों समितियों के प्रबंधक रह चुके हैं। भरत साहू वर्तमान में जिला सहकारी केंद्रीय बैंक मर्यादित की खरोरा शाखा में प्रभारी शाखा प्रबंधक के पद पर पदस्थ हैं। उनके अलावा समिति कनकी के तत्कालीन अध्यक्ष शिवकुमार वर्मा सहित उनके पूरे संचालक मंडल और समिति बुडेनी के तत्कालीन अध्यक्ष अश्वनी वर्मा सहित उनके संचालक मंडल को भी प्रथम दृष्टया दोषी माना गया है। जांच में संबंधित बैंक शाखा के तत्कालीन शाखा प्रबंधक की भूमिका पर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं। रिपोर्ट में स्पष्ट उल्लेख है कि बैंक प्रबंधन की जानकारी और मिलीभगत के बिना इतनी बड़ी राशि का आहरण संभव ही नहीं था।इस जांच रिपोर्ट के आधार पर उप आयुक्त सहकारिता रायपुर पूर्णिमा सिंह ने सख्त रुख अपनाते हुए मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला सहकारी केंद्रीय बैंक मर्यादित को पत्र लिखा था। पत्र में उन्होंने भरत लाल साहू के विरुद्ध बैंकिंग कर्मचारी सेवानियम के तहत तत्काल दंडात्मक कार्यवाही शुरू करने के निर्देश दिए थे। साथ ही की गई कार्यवाही से कार्यालय को अवगत कराने के लिए भी कहा गया था। लेकिन आदेश जारी होने के महीनों बाद भी जमीनी स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया है। भरत लाल साहू का न तो निलंबन किया गया और न ही उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई। पैंतालीस लाख से अधिक की राशि का आज तक कोई हिसाब-किताब नहीं मिल सका है। दोषी ठहराए गए अन्य अध्यक्ष और संचालक मंडल के सदस्यों पर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई है। सुशासन तिहार के शिविर में पहुंचे ग्रामीणों ने विभागीय अधिकारियों के सामने गहरा आक्रोश व्यक्त किया। ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि जांच पूरी होने और सभी आरोपियों को दोषी ठहराए जाने के बाद भी विभाग जानबूझकर मामले को दबा रहा है। ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि जब एक छोटे किसान के केसीसी लोन की किस्त एक दिन भी लेट होने पर उससे पेनल्टी और ब्याज वसूला जाता है तो पैंतालीस लाख रुपये के गबन के मामले में अफसरों की यह चुप्पी किस ओर इशारा करती है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि इस मामले में तत्काल दोषियों पर कार्रवाई शुरू नहीं की गई तो वे कलेक्टर रायपुर और मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपकर पूरे मामले की शिकायत करेंगे। साथ ही सूचना के अधिकार के तहत जांच रिपोर्ट की प्रमाणित प्रति और उस पर हुई कार्रवाई की फाइल की अद्यतन स्थिति भी मांगी जाएगी। ग्रामीणों का कहना है कि वे इस लड़ाई को अंत तक लड़ेंगे ताकि किसानों के पैसे का गबन करने वालों को सजा मिल सके।

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