Home Breaking TILDA: आत्मा का स्वरूप ज्योति स्वरूप है: पंडित पवन तिवारी

TILDA: आत्मा का स्वरूप ज्योति स्वरूप है: पंडित पवन तिवारी

13
0



तिल्दा नेवरा: समीपस्थ ग्राम ताराशिव मेंआयोजित श्रीमद् भागवत कथा के अंतिम दिवस भगवत गीता पर ज्ञान प्रकाशित करते हुए महाराज पंडित पवन तिवारी जी ने कहा महाभारत में भगवान श्री कृष्ण ने धर्म क्षेत्र कुरुक्षेत्र मे मोह से ग्रसित अर्जुन को गीता का ज्ञान दिया। युद्ध के पहले भगवान श्री कृष्ण ने इंद्रप्रस्थ जाकर शांति दुत बनकर कौरवों को समझाया।कम से कम पांडवों को पांच गांव दे दो। लेकिन दुर्योधन तैयार नहीं हुआ। यह महाभारत का युद्ध जर,जोरू और जमीन के लिए होता है।महाभारत का युद्ध सदैव से चला आ रहा है।अधर्म के विरुद्ध धर्म का युद्ध,अन्याय के विरुद्ध न्याय का युद्ध, असत्य के विरुद्ध सत्य का युद्ध।यही महाभारत है। हस्तिनापुर नरेश धृतराष्ट्र महाभारत का युद्ध देखना चाहते थे। जब व्यास जी ने अपने शिष्य संजय को दिव्य दृष्टि प्रदान किया संजय ने धृतराष्ट्र को युद्ध का आंखों देखा हाल सुनाया। अठारह हजार सेनायुद्ध मैदान में जमा हुए। किंतु अर्जुन ने जब अपने परिवार जनों को देखा तो मोह के वशीभूत हो गए। तब भगवान श्री कृष्ण ने गीता का ज्ञान सुनाया।तुम अगर इन्हें नहीं मारोगे तो यह तुम्हें मारेंगे ।जो हुआ अच्छा हुआ, जो हो रहा है अच्छा होगा। जो होगा अच्छा होगा। शरीर नश्वर है,आत्मा अमर है। शरीर का निर्माण माता-पिता के द्वारा होता है।आत्मा का निर्माण परमात्मा के द्वारा होता है। इसलिए शरीर को छोड़ दिया जाता है ।चाहे आग में जलाओ या मिट्टी में दफनाओ। आत्मा को भगवान ले जाते हैं।आत्मा का स्वरूप ज्योति स्वरूप है। अठारह योगो से भरा गीता का ज्ञान जब सुनाया अपना विराट स्वरूप जब दिखाए तब अर्जुन का मोह समाप्त हुआ। और तब महाभारत का युद्ध हुआ। पांडव विजय हुए, हस्तिनापुर के राजा बने।हम सबके जीवन में जब आज्ञा का पर्दा छा जाता है तब हमारी आंखों में भी मोह का पर्दा आ जाता है। फिर हमें गीता का सहारा लेना चाहिए। भगवत गीता भगवान के मुख से निकली हुई वाणी है। भगवान श्री कृष्ण का गीता दिल है। भागवत कथा का अंतिम दिवस गीता ज्ञान के साथ हवन यज्ञ, कपिला तर्पण,सहस्त्र धारा, प्रसाद वितरण भंडारा के साथ संपन्न हुआ।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here