तिल्दा नेवरा: समीपस्थ ग्राम ताराशिव में आयोजित भागवत ज्ञान यज्ञ समारोह के अष्टम् दिवस पर पंडित श्री पवन तिवारी जी ने बताया किभगवान श्री कृष्ण और रुक्मणी जी के विवाह के बाद अनन्या विवाह किये।भगवान श्री कृष्ण के सोलह हजार एक सौ आठ पटरानी हुए।प्रथम पुत्र भगवान के प्रद्युम्न हुए। जो साम्रासुर का वध किये। जरासंध के पास ब्राह्मण का रूप लेकर भगवान श्री कृष्ण, अर्जुन और भीमसेन गए। भीमसेन ने जरासंघ को सत्ताइस दिन के लगातार युद्ध के बाद समाप्त किये। शिशुपाल दंत वक्र का वध किये समाज में शांति स्थापित किये। फिर भगवान द्वारका में निवास करने लगे। सुदामा चरित्र का वर्णन करते हुए महाराज जी ने आज के परिवेश ने बताया मित्रता अगर हो तो सुदामा और कृष्ण जैसे ।मित्रता अगर हो तो सुग्रीव और राम जैसे। मित्रता अगर हो तो दूध और पानी जैसे। सुदामा दरिद्र नहीं बल्कि गरीब था।गरीब होना पाप,अपराध नहीं बल्कि गरीब होकर परमात्मा को भूल जाना यह सबसे बड़ा पाप है।पत्नी सुशीला के कहने पर भगवान से मिलने के लिए सुदामा जी गए। भगवान से मिलने के लिए जब आप चार कदम आगे बढ़ेंगे तो भगवान आपसे मिलने के लिए दस कदम आगे बढ़ेंगे।भगवान ने सुदामा जी को लाने के लिए गरुड़ को भेजा।सुदामा जब पहुंचे तो द्वारपालों ने रोका। यह मिलन मानसिक नहीं बल्कि एक शारीरिक मिलन का दोनों एक दूसरे के गले लगे ।भगवान श्री कृष्ण ने सुदामा जी के चरणों को परिवार सहित पखारा।चरण अमृत लिए। भगवान अपने मित्र के दुख को जान गए और सुदामा जी को कुबेर से भी ज्यादा धनवान बना दिया। सुदामा और सुशीला का जीवन धन्य हुआ। यह भगवान कृष्ण की भक्ति की शक्ति थी।बाद में राजा परीक्षित के मोक्ष की कथा और चढोतरी संप्रेम भेट के साथ बांके बिहारी तेरी आरती गाऊ के साथ भागवत कथा का समापन हुआ। और नगर भ्रमण बाजे गाजे भजन मंडलीके साथ संपन्न हुआ।







