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ट्रांसफर नीति से 3 लाख 60 हजार कर्मचारियों को नहीं मिलेगा ट्रांसफर का मौका ये भेदभाव क्यों?

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ट्रांसफर नीति से शिक्षा, पुलिस, परिवहन, खनिज, वाणिज्य, पंजीयन विभाग के कर्मचारी बाहर ये कैसी नीति

रायपुर: ट्रांसफर नीति से शिक्षा, पुलिस, परिवहन, खनिज, वाणिज्य, पंजीयन विभाग के कर्मचारियों को बाहर करने पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा कि सरकार ट्रांसफर नीति में कर्मचारी-कर्मचारी में भेदभाव कर रही है। ट्रांसफर नीति से शिक्षा, पुलिस, परिवहन, खनिज, वाणिज्य, पंजीयन विभाग के 3.60 लाख कर्मचारियों को बाहर कर दिया गया है। ये कैसी ट्रांसफर नीति 2025 है। प्रदेश में लगभग 4.50 लाख सरकारी कर्मचारी हैं जिसमें से शिक्षा विभाग में 2.50 लाख शिक्षक, पुलिस विभाग में 70 हजार से अधिक कर्मचारी, परिवहन विभाग खनिज विभाग, वाणिज्य विभाग, पंजीयन विभाग मिलाकर लगभग 40 हजार कर्मचारी है। यह कैसी नीति है जिससे कर्मचारी वर्ग के 80 प्रतिशत लोगों को बाहर रखा गया है। सरकार इनके साथ भेदभाव कर रही है। इनके अधिकारों का हनन कर रही है। ये कर्मचारियों के साथ अन्याय है।प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा कि ट्रांसफर के नाम से भाजपा के सरकार के मंत्री अंधाधुन लेनदेन करेंगे ट्रांसफर के इंतजार करें अधिकारी कर्मचारियों की मजबूरी का फायदा उठाएंगे। तहसीलदारों के ट्रांसफर के समय तहसीलदार संघ ने सूची और प्रमाण के साथ करोड़ों रुपए की लेनदेन का आरोप राजस्व मंत्री को पर लगाया था जिसकी जांच अब तक नहीं हुई है, बल्कि सरकार ने दबाव पूर्वक तहसीलदार संघ के पदाधिकारी के पर कार्यवाही की है भाजपा का एक ही काम है भ्रष्टाचार करना। भाजपा ट्रांसफर उद्योग चलाने के लिए जानी जाती है यह ट्रांसफर नीति नहीं बल्कि कर्मचारियों से वसूली अभियान की शुरुआत की है कर्मचारियों का ट्रांसफर नियमानुसार किया जाए बिना दबाव के किया जाए।प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा कि ट्रांसफर कर्मचारियों का अधिकार है उन्हें उनका हक मिलना चाहिए ट्रांसफर पारदर्शी तरीके से होना चाहिए। ट्रांसफर नीति सरकार के सभी विभाग के कर्मचारियों के लिए लागू किया जाये।

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