संजय सेन तिल्दा नेवरा : भारत विविधताओं का देश है यहाँ की संस्कृति भी विविधताओं से भरी है रहन-सहन , वेशभूषा, खानपान , बोली भाषा सब में विविधता है , इसलिए भारत को अनेकता में एकता का देश कहा जाता है शासकीय प्राथमिक शाला पौसरी की शिक्षिको ने इसी विविधता से अपने शाला के बच्चों को अवगत कराने के उद्देश्य से ऑनलाइन गूगल मीट के माध्यम से तमिलनाडु राज्य के यूनियन प्राथमिक शाला कोडीरंगकोट्टा जिला धर्मापुरी के बच्चों से संवाद स्थापित कर एक दुसरे प्रदेश के संस्कृति को साझा करने का प्रयास किया | साथ ही छत्तीसगढ़ राज्य के ही बस्तर के बारसूर के प्राथमिक आश्रम शाला के शिक्षक मुकेश खैरवार व बच्चे भी इस गूगल मीट में जुड़ के अपने सांस्कृतिक विचारों का आदान-प्रदान किया ।
उल्लेखनीय है कि पोसरी की शिक्षिक ने सांस्कृतिक स्रोत एवं प्रशिक्षण केन्द्र (सीसीआरटी) गुवाहाटी असम से सांस्कृतिक विविधता पर 10 दिवसीय प्रशिक्षण प्राप्त किया है | सीसीआरटी राष्ट्रीय स्तर की प्रशिक्षण संस्थान है जो देश भर के सक्रिय शिक्षिकों को सांस्कृतिक व कला सम्बन्धी प्रशिक्षण प्रदान कर उसे संरक्षित व संवर्धन करने के लिए प्रोत्साहित करती है | शिक्षिका के द्वारा छत्तीसगढ़ के सांस्कृतिक विशेषताओं को तमिलनाडु राज्य के शिक्षकों व छात्रों के साथ साझा करने का पहल किया गया | यूनियन प्राथमिक शाला कोडीरंगकोट्टा के शिक्षक इबा शेखरन बालकृष्णन ने अपने शाला के बच्चों के माध्यम से पौसरी के बच्चों को अपने खानपान,रहन-सहन , भाषा व वेशभूषा की जानकारी प्रदान की | उन्होंने कहा कि ये हमारे लिए बहुत ही गौरव का पल है कि हम अपने शाला में रहकर हजारो किलोमीटर दूर छत्तीसगढ़ में बैठे बच्चों व शिक्षकों से संवाद कर एक दुसरे के संस्कृति से परिचित हो रहे है |
शिक्षिका भारती वर्मा ने बताया कि प्रशिक्षण के पश्चात् यह पहला अवसर था जब मै अपने शाला के बच्चों को अन्य राज्य के शिक्षकों व बच्चों से संवाद स्थापित कराकर उनकी संस्कृति को जानने व समझने का पहल कर रही हु |







