हिरमी – रावन: आज सुहागिन महिलाओं ने अटूट सौभाग्य और पति की लंबी आयु का प्रतीक वट सावित्री व्रत श्रद्धा और हर्षोल्लास के साथ मनाया। इस अवसर पर महिलाओं ने सोलह श्रृंगार कर वट वृक्ष (बरगद) की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की और अपने वैवाहिक जीवन में सुख-शांति की कामना की। पूजा की विधि और परंपरा सुबह से ही वट वृक्षों के नीचे महिलाओं की भारी भीड़ देखी गई। व्रती महिलाओं ने वट वृक्ष को जल अर्पित कर उस पर कच्चा सूत लपेटते हुए सात बार परिक्रमा की। महिलाओं ने वट वृक्ष में धागे बांधकर अपने पति के दीर्घायु होने का वरदान मांगा। पूजा के पश्चात उपस्थित श्रद्धालुओं को फल, भीगे चने और मिठाई का प्रसाद वितरण किया गया। सत्यवान-सावित्री की कथा का श्रवण धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सावित्री ने अपने दृढ़ संकल्प और पातिव्रत्य धर्म से यमराज को पराजित कर अपने पति सत्यवान के प्राण वापस ले लिए थे। इसी परंपरा का निर्वहन करते हुए पूजा स्थल पर महिलाओं ने सत्यवान और सावित्री की कथा सुनी। इन महिलाओं ने रखा उपवास इस पावन अवसर पर मुख्य रूप से सीमा वर्मा, टाकेश्वरी साहू, रेणु वर्मा, अंकिता वर्मा, कुसुम श्रध्दा वर्मा, पूजा साहू, कुसुम जायसवाल और भुनेश्वरी पटेल सहित अनेक सुहागिन महिलाओं ने निर्जला व्रत रखकर सामूहिक रूप से पूजा संपन्न की। व्रति महिलाओ ने कही यह व्रत हमारे लिए अटूट श्रद्धा का प्रतीक है। वट वृक्ष की आयु लंबी होती है, इसीलिए हम प्रार्थना करती हैं कि हमारे पति की आयु भी इसी वृक्ष की भांति दीर्घ हो।”







