Home Breaking अल्ट्राटेक सीमेंट कंपनी हिरमी के खिलाफ किसानों-मजदूरों का उग्र आंदोलन, 15 मई...

अल्ट्राटेक सीमेंट कंपनी हिरमी के खिलाफ किसानों-मजदूरों का उग्र आंदोलन, 15 मई को चक्काजाम की चेतावनी, मांगें पूरी नहीं होने पर सड़ मार्ग बाधित करने का ऐलान, प्रशासन और कंपनी प्रबंधन पर लगाए गंभीर आरोप

14
0



बलौदाबाजार-भाटापारा: छत्तीसगढ़।जिले के हिरमी स्थित अल्ट्राटेक सीमेंट कंपनी के खिलाफ क्षेत्र के किसानों, मजदूरों, बेरोजगार युवाओं और स्थानीय ग्रामीणों का आंदोलन अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। लंबे समय से अपनी विभिन्न मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे ग्रामीणों ने कंपनी प्रबंधन पर वादाखिलाफी, स्थानीय लोगों की उपेक्षा, किसानों की जमीनों के दुरुपयोग और मजदूरों के शोषण जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों का शीघ्र समाधान नहीं किया गया तो 15 मई 2026 को विशाल चक्काजाम कर सड़क परिवहन पूरी तरह बाधित किया जाएगा।इस संबंध में जिला कलेक्टर बलौदाबाजार-भाटापारा को विस्तृत आवेदन सौंपते हुए आंदोलन की आधिकारिक सूचना दी गई है। आवेदन में कहा गया है कि कंपनी प्रबंधन और प्रशासन के बीच कई दौर की बैठकों के बावजूद समस्याओं का समाधान नहीं किया गया, जिसके कारण ग्रामीणों में भारी आक्रोश व्याप्त है।कई बार दिया गया आवेदन, फिर भी नहीं निकला समाधान ग्रामीणों द्वारा दिए गए आवेदन में उल्लेख किया गया है कि अल्ट्राटेक सीमेंट कंपनी हिरमी के खिलाफ पहले भी 20 अप्रैल 2026 तथा 8 मई 2026 को प्रशासन को शिकायत और मांग पत्र सौंपे गए थे। इसके बाद एसडीएम विभाग द्वारा 29 अप्रैल, 7 मई और 11 मई 2026 को तहसील कार्यालय सुहेला में बैठक आयोजित की गई। इन बैठकों में तहसीलदार, जनप्रतिनिधि, किसान, मजदूर तथा आंदोलनकारी शामिल हुए, लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि कंपनी प्रबंधन ने किसी भी मुद्दे पर गंभीरता नहीं दिखाई।ग्रामीणों का कहना है कि हर बैठक में केवल आश्वासन दिए गए, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। इससे नाराज होकर 12 मई 2026 से शांतिपूर्ण धरना प्रदर्शन शुरू किया गया।आंदोलनकारियों ने लगाए गंभीर आरोपधरना प्रदर्शन में शामिल किसानों और मजदूरों ने आरोप लगाया है कि कंपनी प्रबंधन द्वारा स्थानीय लोगों का लगातार शोषण किया जा रहा है। प्रदर्शनकारियों के अनुसार कंपनी ने कई किसानों की जमीनों का उपयोग किया, लेकिन उन्हें उचित मुआवजा और रोजगार नहीं दिया गया।आंदोलनकारियों का कहना है कि स्थानीय युवाओं को रोजगार देने के बजाय बाहरी लोगों को प्राथमिकता दी जा रही है, जिससे क्षेत्र में बेरोजगारी लगातार बढ़ रही है। मजदूरों ने यह भी आरोप लगाया कि कंपनी में कार्यरत श्रमिकों के साथ श्रम कानूनों का पालन नहीं किया जा रहा और दुर्घटना होने पर पीड़ित श्रमिकों को उचित सहायता नहीं मिलती।“अब अन्याय नहीं सहेंगे” – आंदोलनकारियों का ऐलानधरना स्थल पर लगाए गए पोस्टर और बैनरों में आंदोलनकारियों ने साफ संदेश दिया है कि अब वे अपने अधिकारों के लिए निर्णायक लड़ाई लड़ेंगे।

पोस्टर में लिखा गया है –“जब तक हक नहीं मिलेगा, तब तक काम नहीं चलेगा।”आंदोलनकारियों ने कहा कि अल्ट्राटेक सीमेंट कंपनी द्वारा लगातार स्थानीय लोगों की अनदेखी की जा रही है। किसानों का आरोप है कि कंपनी के विस्तार और अन्य कार्यों के लिए आसपास के गांवों की शासकीय भूमि और किसानों की जमीनों का अवैध उपयोग किया गया है।ग्रामीणों ने यह भी मांग की है कि आसपास के गांवों में विकास कार्यों के लिए मिलने वाली राशि और सीएसआर मद में खर्च की जा रही रकम की पारदर्शी जानकारी सार्वजनिक की जाए।आंदोलन की प्रमुख मांगेंधरना प्रदर्शन कर रहे किसानों, मजदूरों और ग्रामीणों ने अपनी प्रमुख मांगों में शामिल किया है—सभी उद्योगों में समान मजदूरी दर लागू की जाए। स्थानीय श्रमिकों को रोजगार में प्राथमिकता दी जाए।निकाले गए श्रमिकों को पुनः कार्य पर रखा जाए। किसानों की जमीन से जुड़े समझौतों का पालन किया जाए। प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा और नौकरी दी जाए।कंपनी द्वारा कथित अवैध कब्जों को हटाया जाए।श्रमिकों के हितों और श्रम कानूनों का पालन सुनिश्चित किया जाए। सीएसआर फंड और विकास कार्यों में पारदर्शिता लाई जाए।15 मई को चक्काजाम की चेतावनीग्रामीणों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि 15 मई 2026 से पहले उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया गया तो बड़े स्तर पर चक्काजाम किया जाएगा। आंदोलनकारियों के अनुसार ट्रांसपोर्ट नगर, बैंक सिग्नल चौक, मोहरा से हिरमी सकलोर मार्ग सहित कई प्रमुख रास्तों पर आवागमन बाधित रहेगा।इसके अलावा कंपनी के सड़क मार्ग और सीमेंट परिवहन से जुड़े मार्ग को भी रोकने की बात कही गई है। आंदोलनकारियों ने कहा कि चक्काजाम पूरी तरह शांतिपूर्ण रहेगा, लेकिन यदि किसी प्रकार की अप्रिय घटना होती है तो उसकी जिम्मेदारी प्रशासन और कंपनी प्रबंधन की होगी।प्रशासन और पुलिस पर भी उठे सवालधरना प्रदर्शन के दौरान एसडीओपी भाटापारा, एसडीएम विभाग, तहसीलदार सुहेला तथा थाना प्रभारी की मौजूदगी में कई बार चर्चा हुई, लेकिन आंदोलनकारियों का आरोप है कि प्रशासन भी केवल आश्वासन देने तक सीमित रहा।ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि आंदोलनकारियों पर किसी प्रकार की एफआईआर या दमनात्मक कार्रवाई न की जाए। उनका कहना है कि वे लोकतांत्रिक तरीके से अपनी समस्याओं को उठा रहे हैं और शांतिपूर्ण आंदोलन उनका संवैधानिक अधिकार है।कई अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को भेजी गई प्रतिलिपिइस पूरे मामले की प्रतिलिपि , पुलिस अधीक्षक बलौदाबाजार-भाटापारा, एसडीएम कार्यालय, तहसील कार्यालय सुहेला तथा अल्ट्राटेक सीमेंट कंपनी प्रबंधन को भी भेजी गई है।क्षेत्र में बढ़ा तनाव, आंदोलन को मिल रहा समर्थनहिरमी और आसपास के गांवों में आंदोलन को लेकर माहौल लगातार गरमाता जा रहा है। बड़ी संख्या में किसान, मजदूर और स्थानीय नागरिक आंदोलन के समर्थन में सामने आ रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि प्रशासन समय रहते समाधान नहीं निकालता है तो आंदोलन और अधिक उग्र हो सकता है।अब सबकी नजर प्रशासन और कंपनी प्रबंधन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई है। देखना होगा कि 15 मई से पहले कोई सकारात्मक समाधान निकलता है या फिर क्षेत्र में बड़ा चक्काजाम और व्यापक आंदोलन देखने को मिलेगा

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here