तिल्दा-नेवरा : शहर में ओवरलोड वाहनों की लगातार आवाजाही और उन पर हो रही कथित दिखावटी कार्रवाई अब गंभीर सवालों के घेरे में है। एक ही वाहन मालिक के ट्रकों पर बार-बार कार्रवाई होने के बावजूद उनका दोबारा ओवरलोड हालत में शहर में प्रवेश करना पुलिस व्यवस्था की सख्ती पर प्रश्नचिह्न लगा रहा है। वहीं, इस पूरे मामले में थाना प्रभारी के कथित जवाब ने इसे और अधिक चर्चित बना दिया है।सोमवार को ट्रक क्रमांक MP15 ZJ 6373 भूसे से ओवरलोड होकर शहर क्षेत्र से गुजर रहा था। वाहन एक मशरूम कंपनी की ओर जा रहा था और ऊंचाई तक भरे भूसे के कारण सड़क पर खतरे की स्थिति बन रही थी। सूचना मिलने पर पेट्रोलिंग टीम ने ट्रक को ओवरब्रिज के पास रोक लिया।मामले की गंभीरता को देखते हुए एक स्थानीय पत्रकार ने तत्काल थाना प्रभारी को फोन कर जानकारी दी। सूत्रों के अनुसार थाना प्रभारी की ओर से कथित रूप से कहा गया—“यह कार्रवाई पहले भी हो चुकी है, बार-बार यह कार्रवाई क्या होगी, फिर भी मैं देखता हूं।”थाना प्रभारी के इस कथित जवाब ने शहर में पुलिस कार्रवाई की नीयत और पारदर्शिता को लेकर नई बहस छेड़ दी है। नागरिकों का कहना है कि जब पहले इसी मालिक के ट्रक पर उप निरीक्षक विकास देशमुख द्वारा 19 मार्च को 20 हजार रुपए का चालान किया जा चुका है, तो दोबारा उसी तरह का वाहन शहर में पकड़े जाने पर और ज्यादा कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए थी।लेकिन मौके से सामने आई जानकारी ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार पेट्रोलिंग द्वारा ट्रक चालक को 2 हजार रुपए का चालान काटने की बात कहकर वाहन को ओवरब्रिज के पास खड़ा करने के निर्देश दिए गए। वहीं, चालक ने कथित तौर पर यह भी कहा कि उसे देर रात करीब 2:30 बजे चुपचाप ट्रक निकालने की बात कही गई है।यदि यह दावा सही है, तो यह केवल यातायात नियमों के उल्लंघन का मामला नहीं, बल्कि कार्रवाई को केवल दिखावे तक सीमित रखने का गंभीर आरोप बन जाता है। शहरवासियों का कहना है कि इस तरह की नरमी और कथित ‘सेटिंग’ से ओवरलोड वाहन मालिकों के हौसले बुलंद होते हैं, जिसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ सकता है।डॉ. खूबचंद बघेल चौक, ओवरब्रिज और बाजार क्षेत्र जैसे व्यस्त मार्गों से गुजरने वाले ऐसे भारी वाहन कभी भी बड़े हादसे का कारण बन सकते हैं। खासकर भूसे और अन्य हल्के लेकिन अत्यधिक ऊंचाई तक भरे माल वाले ट्रक तेज हवा या मोड़ पर असंतुलित होकर पलटने का खतरा बढ़ा देते हैं।स्थानीय व्यापारियों, राहगीरों और सामाजिक संगठनों ने इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। लोगों का कहना है कि यदि बार-बार एक ही मालिक के वाहनों पर चालानी कार्रवाई के बाद भी सुधार नहीं हो रहा, तो वाहन मालिक के खिलाफ कड़ी दंडात्मक कार्रवाई के साथ जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए।यह मामला अब शहर में ओवरलोड ट्रकों पर पुलिस की वास्तविक सख्ती बनाम दिखावटी कार्रवाई की बहस का केंद्र बन गया है। नागरिकों की नजर अब इस बात पर टिकी है कि पुलिस प्रशासन इस पर क्या स्पष्ट जवाब देता है और भविष्य में ऐसी घटनाओं पर कितनी गंभीरता से कार्रवाई होती है।







