Home Breaking BALODABAZAR: दृष्टिकोण का परिवर्तन ही जीवन की सार्थकता – प्रज्ञापुत्र जगदीश साहू

BALODABAZAR: दृष्टिकोण का परिवर्तन ही जीवन की सार्थकता – प्रज्ञापुत्र जगदीश साहू

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हिरमी – रावन: अखिल विश्व गायत्री परिवार शांतिकुंज हरिद्वार के तत्वावधान में और युगऋषि परम पूज्य गुरुदेव पं. श्रीराम शर्मा आचार्य एवं वंदनीया माता भगवती देवी शर्मा के सूक्ष्म संरक्षण में ग्राम सकलोर ( हिरमी ) में भव्य प्रज्ञा पुराण कथा एवं 05 कुंडीय गायत्री महायज्ञ का आयोजन किया जा रहा है। दृष्टिकोण का परिवर्तन ही जीवन की सार्थकता कथा के सातवें अध्याय का वर्णन करते हुये कथावाचक श्रद्धेय जगदीश साहू ने ‘प्रज्ञा अवतार’ के मर्म को समझाते हुए कहा कि मानव जीवन में श्रेष्ठता लाने के लिए सत्संग और सही दृष्टिकोण अनिवार्य है। उन्होंने जोर देकर कहा कि आदर्शों की शक्ति जब जीवन में विकट परिस्थितियां आएं, तब अपने आदर्शों को विस्मृत न होने देना ही वास्तव में ईश्वर के ‘दिव्य हस्तक्षेप’ का अनुभव करना है।उन्होंने कहा कि मनुष्य के भीतर अपार शक्तियां हैं, लेकिन यदि दिशा गलत हो जाए तो जीवन नरक बन सकता है। सत्संग वह प्रकाश है जो भटके हुए दृष्टिकोण को सही दिशा में मोड़ता है। प्रज्ञा पुराण के अनुसार, गायत्री मंत्र के ‘तत्सवितुर्वरेण्यं’ भाव को जीवन में उतारना यानी श्रेष्ठता का वरण करना ही असली साधना है। आयोजन के चौथे दिन 05 कुंडीय गायत्री यज्ञ संपन्न हुआ, जिसमें भारी संख्या में श्रद्धालुओं ने आहुतियां समर्पित कीं। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में ग्राम सरपंच श्रीमती ममता वेद प्रकाश वर्मा सम्मिलित हुईं। इस अवसर पर स्व. अयोध्या प्रसाद वर्मा एवं स्व. सुरुज बाई की स्मृति में आगंतुक अतिथियों एवं वरिष्ठ नागरिकों के लिए विशाल ‘भोजन प्रसाद’ (भंडारा) का आयोजन किया गया। गायत्री मंदिर प्रांगण में आयोजित इस आध्यात्मिक अनुष्ठान में मुख्य यजमान उपसरपंच श्रीमती कौशल्या दूलेश धीवर, दिलीप-सरिता वर्मा, सुशीला-तोपू साहू, सरोज-हीरासिंह वर्मा, अश्वनी-राधिका वर्मा और पार्वती-बसंत साहू ने सपरिवार विधि-विधान से पूजन संपन्न किया। विशिष्ट अतिथि एवं सम्मानीय कार्यक्रम में जनपद सदस्य उमा अनंत, कुथरौद सरपंच तारनदास अनंत, उपसरपंच रेखाकृष्णा वर्मा, दिलेश्वर मढरिया,सहित गांव के वरिष्ठ नागरिक चोवाराम सिंहा, जनक वर्मा, केजू राम वर्मा, जयप्रकाश वर्मा और शिव साहूसहित गायत्री परिजन विशेष रूप से उपस्थित रहे। कथा श्रवण करने हेतु आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रोता पहुंचे, जिन्होंने प्रज्ञा पुराण के अमृत वचनों को सुनकर आत्म-जागरण का संकल्प लिया।

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