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तिल्दा-नेवरा में भक्ति का अनूठा संगम: केवट की अनन्य भक्ति देख छलके श्रद्धालुओं के आँसू, मंत्री वर्मा ने लिया आशीर्वाद

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नितिन कुमार जायसवाल तिल्दा-नेवरा: “राम ही केवल प्रेम पियारा, जानि लेहु जो जान निहारा…” गोस्वामी तुलसीदास जी की ये पंक्तियाँ गुरुवार को तिल्दा-नेवरा के बी.एन.बी. स्कूल मैदान में चरितार्थ होती दिखीं। अवसर था श्री सोन चन्द वर्मा स्मृति फाउंडेशन द्वारा आयोजित भव्य ‘श्री राम कथा’ के पांचवें दिन का, जहाँ सुप्रसिद्ध मानस मर्मज्ञ सुश्री देवी चंद्रकला जी ने केवट प्रसंग का ऐसा सजीव वर्णन किया कि उपस्थित हजारों जनसमूह की आँखें नम हो गईं।जब भक्त के हठ के आगे झुके भगवानकथा के पांचवें दिन भगवान राम के वनगमन और केवट संवाद के प्रसंग ने पांडाल में मौजूद हर व्यक्ति के हृदय को झकझोर दिया। सुश्री देवी चंद्रकला जी ने अपनी सुमधुर और ओजस्वी वाणी में उस क्षण का वर्णन किया जब केवट ने प्रभु श्री राम की नाव में चढ़ाने से पहले उनके चरण पखारने की जिद की थी। उन्होंने कहा— “जिस प्रभु के एक नाम लेने मात्र से मनुष्य भवसागर पार कर जाता है, उस परमात्मा के चरणों को धोने का सौभाग्य एक साधारण केवट को उसकी भक्ति के कारण मिला।” जब व्यासपीठ से यह प्रसंग सुनाया गया कि केवट ने प्रभु से मजदूरी लेने से इनकार कर दिया और कहा कि ‘प्रभु! हम एक ही जात के हैं, मैं नैया पार कराता हूँ और आप दुनिया को पार कराते हो’, तब पूरा पांडाल ‘जय श्री राम’ के उद्घोष से गूंज उठा और भक्त भाव-विभोर होकर झूमने लगे।कैबिनेट मंत्री टंक राम वर्मा ने की शिरकत कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में प्रदेश के कैबिनेट मंत्री माननीय टंक राम वर्मा उपस्थित हुए। उन्होंने व्यासपीठ का विधि-विधान से पूजन किया और सुश्री देवी चंद्रकला से आशीर्वाद लिया। जनता को संबोधित करते हुए मंत्री ने कहा— “आज के भौतिकवादी युग में श्री राम का चरित्र ही हमें सही मार्ग दिखा सकता है। श्री सोन चन्द वर्मा स्मृति फाउंडेशन ने इस भव्य आयोजन के जरिए तिल्दा-नेवरा को अयोध्या जैसा स्वरूप दे दिया है।” उन्होंने इस धार्मिक अनुष्ठान के लिए आयोजकों की मुक्त कंठ से प्रशंसा की।फाउंडेशन की सेवा और भक्ति की बयार1 फरवरी से निरंतर चल रही इस राम कथा ने पूरे क्षेत्र को आध्यात्मिक रंग में रंग दिया है। श्री सोन चन्द वर्मा स्मृति फाउंडेशन के तत्वाधान में आयोजित इस सात दिवसीय ज्ञान यज्ञ में न केवल तिल्दा, बल्कि आस-पास के दर्जनों गांवों से श्रद्धालु ट्रैक्टरों और बसों में भरकर पहुँच रहे हैं। फाउंडेशन द्वारा बुजुर्गों और महिलाओं के लिए बैठने की विशेष व्यवस्था व शीतल जल तथा प्रसाद का सुचारू प्रबंधन किया गया है।कल के प्रसंग पर रहेगी नजरकथा के समापन पर भव्य आरती का आयोजन हुआ, जिसमें हजारों दीपकों की रोशनी ने अद्भुत दृश्य उत्पन्न किया। कल की कथा में प्रभु राम के आगे के वनवास, चित्रकूट निवास और भरत मिलाप जैसे महत्वपूर्ण प्रसंगों की व्याख्या की जाएगी। अटूट आस्था: भीषण गर्मी के बावजूद पांडाल खचाखच भरा रहा, लोग जमीन पर बैठकर कथा सुनते नजर आए।भजनों की प्रस्तुति: देवी चंद्रकला जी के भजनों पर श्रद्धालु मंत्रमुग्ध होकर झूमते रहे।सुरक्षा और सेवा: फाउंडेशन के वालंटियर्स ने पूरी मुस्तैदी के साथ व्यवस्था संभाली।

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