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बंदोबस्त त्रुटि के बाद रसूखदारों ने किया गरीब की जमीन पर कब्जा, पांच वर्षों से परेशान किसान परिवार सहित भूख हड़ताल पर बैठा

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गरियाबंद : जिला कलेक्ट्रेट के सामने आज उस समय गहमा गहमी की स्थिति उत्पन्न हो गई जब अमलीपदर तहसील क्षेत्र के ख़रीपथरा गांव का एक किसान रोते बिलखते परिवार सहित भूख हड़ताल पर बैठ गया। बताया जा रहा है कि ख़रीपथरा गांव का गरीब किसान मुरहा पिता रूपधर माली पिछले 35 वर्षों से अपनी जमीन खसरा नम्बर 1/ 83 रकबा 2.833 हेक्टेयर पर काश्तकारी करते आ रहा था।बंदोबस्त के बाद उक्त जमीन पर मोतीराम पिता चमरू यादव तथा आलाराम पिता गंगाराम यादव का नाम दर्ज हो गया। जिसके बाद इन दोनों रसूखदारों ने मुरहा को काश्त कब्जा से बेदखल कर दिया। जिसके बाद आवेदक मुरहा के द्वारा बंदोबस्त त्रुटि सुधार के लिये तहसील अमलीपदर के समक्ष आवेदन प्रस्तुत किया गया, प्रकरण बयान में ग्रामीणों के द्वारा उक्त भूमि पर 35 वर्षो से रूपधर का काश्त कब्जा होना बताया। ग्राम पंचायत द्वारा भी मुरहा पिता रूपधर के समर्थन में लिखित प्रस्ताव पारित किया गया। न्यायालय तहसीलदार अमली पदर द्वारा मोतीराम और आला राम यादव को उक्त भूमि से बेदखल कर बंदोबस्त पूर्व कब्जा काश्त के अनुसार मुरहा पिता रूपधर का कब्जा काश्त यथावत रखने आदेश पारित किया गया था, किन्तु मैनपुर अनुविभागीय अधिकारी द्वारा कुछ ही दिनों बाद स्थगन आदेश जारी कर दिया गया। पीड़ित मुरहा और उसका परिवार पिछले चार वर्षों से इस बंदोबस्त त्रुटि से परेशान है। अपनी जमीन पर काश्तकारी नही कर पा रहे हैं। उनकी आजीविका इसी जमीन पर किसानी से चल रही थी, अब आर्थिक स्थिति बहुत बिगड़ चुकी है। अनावेदक गांव के रसूखदार बताये जा रहे हैं, पीड़ित परिवार राजस्व अधिकारियों पर पैसे के लेनदेन का आरोप लगा रहे हैं। सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने से परेशान आज परिवार सहित अनिश्चित कालीन भूख हड़ताल पर बैठ गये है, और न्याय की मांग कर रहे हैं। इस मामले में मौके पर पहुंचे जिला पंचायत सदस्य संजय नेताम ने कहा कि गरीब किसान के साथ न्याय होना चाहिये, तहसीलदार द्वारा इनके पक्ष में आदेश जारी किया था, किन्तु पैसे के दम पर बाहुबलियों के द्वारा एसडीएम मैनपुर से स्थगन आदेश जारी करवा लिया गया, अब सुनने में आ रहा कि एसडीएम खुद के आदेश को खुद ही निरस्त कर रहे हैं, मैं इस मामले उचित जांच और न्याय की मांग करता हूँ। तहसीलदार सुशील कुमार भोई ने कहा कि बंदोबस्त त्रुटि हुई है, जिसका सर्वे के द्वारा निदान किया जा सकता है, जो सर्वे टीम के गठन के बाद ही संभव है। मैंने इनके पक्ष में कब्जा दिलाने का आदेश जारी किया था, किन्तु अनावेदक अपील में चले गये और स्थगन ले आये। जिसके बाद अनावेदकों ने पुनः उक्त भूमि पर कब्जा कर लिया।

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