तिल्दा नेवरा: ग्राम ताराशिव में चल रहे भागवत ज्ञान यज्ञ समारोह में पंचम दिवस भागवत आचार्य पंडित पवन तिवारी जी ने वामन अवतार,श्री राम जन्म एवं श्री कृष्ण जन्मोत्सव पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए बताया कि मनु और सतरूपा के दो पुत्र हुए। एक उत्तानपाद और दूसरा प्रियव्रत। उत्तानपाद की दो रानियां सुरुचि और सुनीति थी।राजा को सुरुचि ज्यादा प्रिय था ।दोनों रानी के दो पुत्र हुए सुनीति का पुत्र हुआ ध्रुव,सुरुचि का पुत्र हुआ उत्तम।एक दिन धुव माता-पिता के गोद में बैठना चाहते थे। लेकिन सुरुचि ने धिक्कार दिया गोद में बैठने से मना किया तपस्या करने की प्रेरणा दी ।अपमानित होकर धुव सुनीति माता के पास रोते हुए गया। तब सुनीति माता ने कहा तुम संसारी पिता के गोद में क्यों बैठोगे।तुम्हें तो परमपिता की गोद में बैठना चाहिए। और धुव जंगल की ओर चले गए कठिन तपस्या किये ।संत नारद के मार्गदर्शन में परमपिता परमात्मा नारायण को प्राप्त किये। आज संसार सुरुचि माता और कैकई माता को दोष देते हैं किंतु आज अगर सुरुचि माता नहीं होती आज ध्रुव ध्रुव नहीं होता। और कैकई माता अगर नहीं होती तो आज राम-राम नहीं होता ।आज राम को राम किसी ने बनाया तो वह कैकई माता थी।जड़ भरत कथा,अजामिल की कथा,समुद्र मंथन की कथा,वामन अवतार की कथा,श्री राम जन्मोत्सव, श्री कृष्ण जन्मोत्सव बहुत ही सुंदर झांकी के साथ संपन्न हुआ।महाराज जी ने कहा जब जब धर्म की हानि होती है तब तब भगवान श्री राम आते हैं।और जब संसार में गलानि होती है भगवान श्री कृष्णआते हैं।धर्म की स्थापना के लिए, गौ माता की सेवा के लिए ब्राह्मण की रक्षा के लिए, अधर्मियों के विनाश के लिए, परमात्मा कभी राम बनके तो कभी श्याम बनके आते हैं। भागवत कथा का आयोजन श्रीमती हेमकल्याणी वर्मा,लता वर्मा,जितेंद्र वर्मा, धर्मेंद्र,सुरेंद्र वर्मा एवं अक्षय कुमार वर्मा परिवार द्वारा कराया जा रहा है कथा का रसपान करने के लिए दूर-दूर से भक्तजन काफी संख्या में आ रहे हैं। और अपने जीवन को कृतार्थ बना रहे हैं। भागवत कथा प्रतिदिन दोपहर 2:00 बजे से प्रारंभ होती है।आयोजक परिवार द्वारा श्रद्धालु भक्तों के लिए जलपान की भी व्यवस्था की गई है।







