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TILDA: जे बी पब्लिक स्कूल पर आरोप: किताबों से लेकर फीस बढ़ोतरी तक, पालकों में बढ़ा आक्रोश

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तिल्दा-नेवरा : के J B पब्लिक स्कूल को लेकर अभिभावकों की नाराजगी लगातार गहराती जा रही है। स्कूल प्रबंधन पर पहले से ही बच्चों की किताबें, कॉपियां और अन्य अध्ययन सामग्री सिर्फ एक तय दुकान से खरीदने का कथित दबाव बनाने के आरोप लग रहे थे, वहीं अब चुनिंदा पालकों को बुलाकर फीस बढ़ोतरी पर चर्चा किए जाने का नया मामला सामने आने से विवाद और गहरा गया है। पालकों ने इसे निजी शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता की कमी और मनमानी का उदाहरण बताया है।अभिभावकों का आरोप है कि स्कूल में अध्ययन सामग्री के लिए बाजार में उपलब्ध अन्य विकल्पों को नजरअंदाज कर एक निश्चित दुकान से ही खरीदारी करने के लिए कहा जा रहा है, जिससे उन्हें अधिक कीमत चुकानी पड़ रही है। कई पालकों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि बाजार में वही किताबें और कॉपियां कम दाम में उपलब्ध हैं, लेकिन स्कूल की ओर से तय दुकान से ही खरीदने की अनिवार्यता जैसा माहौल बनाया गया। इससे पालकों को आर्थिक बोझ झेलना पड़ रहा है।मामला यहीं तक सीमित नहीं रहा। पालकों के अनुसार, सोमवार को स्कूल परिसर में एक नोडल मीटिंग आयोजित की गई, जिसमें केवल 8 से 10 सक्षम और आर्थिक रूप से मजबूत परिवारों के पालकों को बुलाया गया। आरोप है कि इस बैठक में 10 से 12 प्रतिशत तक फीस वृद्धि का प्रस्ताव रखा गया और स्कूल भवन की स्थिति तथा मरम्मत की आवश्यकता का हवाला देकर इसे उचित ठहराने का प्रयास किया गया।सबसे गंभीर सवाल यह उठ रहा है कि आर्थिक रूप से कमजोर और मध्यमवर्गीय परिवारों के पालकों को इस बैठक की जानकारी तक नहीं दी गई। कई अभिभावकों का कहना है कि उन्हें बाद में फीस बढ़ोतरी की चर्चा की जानकारी मिली, जबकि इतने महत्वपूर्ण फैसले में उनकी राय लेना तो दूर, उन्हें बैठक में शामिल होने का अवसर भी नहीं दिया गया। इससे पालकों में गहरा असंतोष है।स्थानीय नागरिकों और पालकों का कहना है कि यह मामला अब केवल एक स्कूल तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरे निजी शिक्षा तंत्र में पारदर्शिता, जवाबदेही और पालक अधिकारों से जुड़ा बड़ा मुद्दा बन गया है। उनका कहना है कि यदि फीस बढ़ोतरी जैसा निर्णय लिया जाना है, तो सभी पालकों को समान रूप से सूचना देकर उनकी सहमति और सुझाव लेना आवश्यक है। चुनिंदा लोगों के बीच ऐसे फैसले करना नियमों और नैतिकता दोनों पर सवाल खड़े करता है।

पालकों ने विकासखंड शिक्षा अधिकारी (BEO) और जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। शिकायत में खास तौर पर निम्न बिंदुओं को शामिल किया गया है—एक तय दुकान से किताबें बिकवाने के आरोपनोडल मीटिंग में चुनिंदा पालकों को बुलाने की प्रक्रिया10–12% फीस वृद्धि के प्रस्ताव की वैधतागरीब और कमजोर परिवारों को जानकारी न देने के आरोपपालकों का कहना है कि यदि जांच में किसी भी प्रकार की अनियमितता सामने आती है, तो स्कूल प्रबंधन और जिम्मेदार पदाधिकारियों पर नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए, ताकि भविष्य में किसी अन्य निजी स्कूल में इस तरह की मनमानी न हो।शहर में अब यह सवाल तेजी से उठ रहा है कि “क्या निजी स्कूलों में शिक्षा अब पारदर्शी व्यवस्था के बजाय तय दुकानों और चुनिंदा बैठकों का माध्यम बनती जा रही है?”यह पूरा मामला अब लोकहित, अभिभावक अधिकार और शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता से जुड़ा गंभीर मुद्दा बन चुका है, जिस पर प्रशासनिक हस्तक्षेप की मांग तेज हो गई है।

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