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तिल्दा नेवरा में नाली निर्माण का बड़ा घोटाला? वार्ड 3 के बाद अब वार्ड 11 के काम पर भी उठे सवाल? इंजीनियर की भूमिका जांच के घेरे में

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नितिन कुमार जायसवाल 6260174756 तिल्दा नेवरा: नगर पालिका परिषद तिल्दा-नेवरा में नाली निर्माण कार्य को लेकर बड़ा घोटाला सामने आने के बाद अब मामला और तूल पकड़ता जा रहा है। वार्ड क्रमांक 3 में नाली निर्माण में भारी अनियमितता उजागर होने के बाद अब उसी ठेकेदार द्वारा वार्ड क्रमांक 11 में किए गए नाली निर्माण कार्य की भी जांच की मांग उठने लगी है।जानकारी के अनुसार वार्ड क्रमांक 3 में कुल 454 मीटर नाली निर्माण स्वीकृत था, लेकिन मौके पर लगभग 200 मीटर के आसपास ही निर्माण कार्य किया गया है? इसके बावजूद दस्तावेजों में 650 मीटर नाली निर्माण दर्शाकर लगभग 85 प्रतिशत बिल का भुगतान ठेकेदार को कर दिया गया। मामला सामने आने के बाद पालिका प्रशासन में हड़कंप की स्थिति बन गई है।इधर, इस घोटाले के उजागर होने के बाद अब लोगों की नजर वार्ड क्रमांक 11 में इसी ठेकेदार द्वारा कराए गए नाली निर्माण कार्य पर भी टिक गई है। स्थानीय लोगों द्वारा उस कार्य की भी भौतिक जांच कराने की मांग उठाई जा रही है, ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके।सबसे ज्यादा चर्चा उस इंजीनियर की भूमिका को लेकर हो रही है जिसने निर्माण कार्य का भौतिक सत्यापन किया था। बताया जा रहा है कि फर्जी तरीके से सत्यापन कर भारी भरकम बिल पास कराने में इंजीनियर की भूमिका संदिग्ध बताई जा रही है।सूत्रों के अनुसार इस पूरे मामले में चर्चा में आए इंजीनियर पुष्कर चंद्राकर का ट्रांसफर भी हो चुका है, और उन्हें तत्काल रिलीव करने का आदेश जारी किया गया था। इसके बावजूद राजनीतिक दबाव के चलते वे अब तक तिल्दा नेवरा नगर पालिका से रिलीव नहीं हुए और यहीं जमे हुए हैं।वहीं नगरीय प्रशासन विभाग द्वारा जारी आदेश में स्पष्ट कहा गया था कि जिन अधिकारियों का तबादला किया गया है यदि वे नई पदस्थापना स्थल पर कार्यभार ग्रहण नहीं करते हैं तो जनवरी माह से उनका वेतन वृद्धि रोकी जाएगी। इसके बावजूद विश्वस्त सूत्रों के अनुसार जनवरी माह से इंजीनियर का वेतन भुगतान भी जारी है, जिससे पूरे मामले में कई सवाल खड़े हो गए हैं।अब स्थानीय स्तर पर वार्ड क्रमांक 3 और वार्ड क्रमांक 11 में हुए नाली निर्माण कार्य की निष्पक्ष जांच, संबंधित ठेकेदार के खिलाफ सख्त कार्रवाई और इस पूरे मामले में इंजीनियर पुष्कर चंद्राकर की भूमिका की भी गहन जांच की मांग जोर पकड़ रही है।मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार के मंत्री टंकराम वर्मा से भी इस संबंध में चर्चा करने की कोशिश की जा रही है, वहीं नगरीय प्रशासन मंत्री के समक्ष भी यह मुद्दा उठाने की तैयारी की जा रही है ताकि इस पूरे घोटाले की उच्चस्तरीय जांच हो सके।यदि समय रहते जांच नहीं हुई तो नगर पालिका में विकास कार्यों के नाम पर हो रहे ऐसे घोटाले आगे भी जारी रहने की आशंका जताई जा रही है।

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