
हिरमी – रावन : आज के आधुनिक दौर में जिसे हम विकास और सुविधा का नाम दे रहे हैं, वही हमारे विनाश का कारण बनता जा रहा है। जंक फूड के रंगीन पैकेट और उनमें इस्तेमाल होने वाली पॉलिथीन आज संपूर्ण प्राणी जगत के लिए एक काल (धीमा जहर) बनकर उभरी है। एक जागरूक नागरिक द्वारा साझा की गई दो हृदयविदारक घटनाएं इसकी गवाह हैं। कम आमदनी, कम शिक्षा और बच्चों का दांव पर लगा स्वास्थ्य ग्रामीण क्षेत्रों में कम कीमत और अधिक मात्रा के लालच में जंक फूड का चलन तेजी से बढ़ रहा है। अभिभावक, विशेषकर वे जो कम पढ़े-लिखे हैं या जिनकी आय सीमित है, वे बच्चों की जिद पूरी करने के लिए चंद रुपयों में ये ‘जहर’ खरीद कर देते हैं। इन जंक फूड्स में हानिकारक रसायन, अत्यधिक नमक और घटिया तेल का उपयोग होता है, जो बच्चों में शारीरिक विकृतियां और दिव्यांगता जैसी स्थितियां पैदा कर रहा है। स्कूलों के आसपास बिखरे पैकेट इस बात का प्रमाण हैं कि हमारी भावी पीढ़ी नशे की तरह इसकी गिरफ्त में है। बेजुबानों की मौत का मूक गवाह दूसरी घटना रोंगटे खड़े कर देने वाली है। कचरे के ढेर में खाने की तलाश करते गाय-बैल इन जंक फूड के वेपर्स (पैकेटों) को निगल लेते हैं। एक प्रत्यक्षदर्शी के अनुसार ”एक गाय ने पर्याप्त मात्रा में पॉलिथीन खा ली। दो दिन तक वह तड़पती रही और अंततः उसकी मृत्यु हो गई। मृत्यु के बाद जब जंगली जानवरों ने उसे खाया, तो कंकाल के साथ केवल पॉलिथीन का ढेर मिला, जो उसकी आंतों में फंसा हुआ था।” यह स्पष्ट है कि पॉलिथीन को पचाना किसी भी जीव के लिए असंभव है और यह उनकी दर्दनाक मौत का सबसे बड़ा कारण है। पॉलिथीन और जंक फूड का यह गठजोड़ मानव सभ्यता और प्रकृति, दोनों का दुश्मन है। जिन बच्चों को हम देश का भविष्य कहते हैं, उन्हें हम खुद अपने हाथों से बीमारी की ओर धकेल रहे हैं। साथ ही, हमारी लापरवाही बेकसूर जानवरों की जान ले रही है। जंक फूड विक्रेताओं और उत्पादकों के खिलाफ सामूहिक आवाज उठाएं। अपने सगे-संबंधियों और ग्रामीणों को इसके घातक परिणामों के प्रति जागरूक करें। ’पॉलिथीन मुक्त’ समाज के संकल्प को धरातल पर उतारें। क्या आप इस मुहिम का हिस्सा बनेंगे? यदि हम आज नहीं जागे, तो कल पछताने का भी अवसर नहीं मिलेगा। अपने बच्चों और पशु-पक्षियों की सुरक्षा के लिए इस News को जन-जन तक पहुँचाएं।






