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BALODABAZAR: सकलोर में गूंजा वसुधैव कुटुंबकम का संदेश, पांच कुंडीय महायज्ञ और प्रज्ञा पुराण कथा

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हिरमी – रावन: अखिल विश्व गायत्री परिवार शांति कुंज हरिद्वार के तत्वावधान में गायत्री प्रज्ञापीठ सकलोर ( हिरमी ) में पांच कुंडीय गायत्री महायज्ञ एवं प्रज्ञा पुराण कथा का दिव्य आयोजन शुरू हो गया है। शुक्रवार सुबह मुख्य पूजन के साथ कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ किया गया। इस आध्यात्मिक अनुष्ठान का मुख्य उद्देश्य व्यक्तिगत और सामाजिक बुराइयों को दूर कर समाज में नई चेतना जाग्रत करना है। भजन और कथा से हुआ आध्यात्मिक उत्थानकार्यक्रम के प्रारंभ में विष्णु विश्वकर्मा ने सुमधुर भजनों की प्रस्तुति दी, जिससे वातावरण भक्तिमय हो गया। इसके पश्चात कथाकार जगदीश साहू ने पावन प्रज्ञा पुराण कथा का रसपान कराते हुए कहा कि प्रज्ञा पुराण 18 पुराणों का सार है। उन्होंने जोर देकर कहा कि धार्मिक और नैतिक कथाओं के श्रवण से ही मनुष्य का वास्तविक नैतिक उत्थान संभव है। प्रज्ञा पुराण के चार खंड: जीवन जीने की कला आयोजन के दौरान प्रज्ञापुत्र जगदीश जी ने प्रज्ञा पुराण की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए इसके चार खंडों की विस्तृत व्याख्या की: प्रथम खंड: लोक कल्याण और जिज्ञासा प्रकरण के माध्यम से प्राणी को ‘आत्मबोध’ कराता है। द्वितीय खंड: मानव को स्वार्थ की संकीर्णता से ऊपर उठाकर ‘परमार्थ’ की प्रेरणा देता है तृतीय खंड: परिवार निर्माण, नारी जागरण और शिशु निर्माण के साथ ‘वसुधैव कुटुंबकम’ का पाठ पढ़ाता है। चतुर्थ खंड: भारतीय संस्कृति के पुनर्जागरण का शक्तिशाली संदेश देता है। नारद-विष्णु संवाद और विश्व बंधुत्व कथाव्यास ने नारद-विष्णु संवाद के माध्यम से बताया कि प्रज्ञा पुराण में ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की अवधारणा अत्यंत विशाल है। भारतीय संस्कृति की महानता को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा, “भारत में पशु-पक्षियों को भी परिवार का हिस्सा माना जाता है। गाय की पहली रोटी और कुत्ते की अंतिम रोटी निकालने की परंपरा इसी प्रेम का प्रतीक है।” उन्होंने संदेश दिया कि सच्चा सुख लेने में नहीं, बल्कि देने में निहित है।युग ऋषि के विचारों का प्रसार यह आयोजन युग ऋषि पं. श्रीराम शर्मा आचार्य और माता भगवती देवी शर्मा के विचारों से प्रेरित है। कलश यात्रा, देवपूजन और गायत्री मंत्र लेखन जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से इस अनुष्ठान ने न केवल आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार किया है, बल्कि सामाजिक एकता और नैतिकता की नींव को भी मजबूत किया है।

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