
हिरमी- रावन: स्थानीय विद्यालय ज्ञानोदय शिशु मंदिर हिरमी के छात्र-छात्राओं के लिए बीते दिनों एक दिवसीय शैक्षणिक भ्रमण का आयोजन किया गया। इस दौरान बच्चों ने छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों— खल्लारी (भीमखोज) और चण्डीदेवी (घुचापाली, बागबाहरा) का भ्रमण किया।पौराणिक इतिहास से परिचयभ्रमण की शुरुआत खल्लारी से हुई, जहाँ बच्चों ने पहाड़ी पर स्थित भीमखोज और माता खल्लारी के मंदिर के दर्शन किए। शिक्षकों ने बच्चों को महाभारत काल से जुड़ी कथाएं सुनाईं और बताया कि किस तरह पांडवों ने यहाँ अपना समय व्यतीत किया था। भीम के पदचिह्नों (भीमखोज) को देखकर बच्चे काफी उत्साहित नजर आए। इसके पश्चात, दल बागबाहरा के निकट घुचापाली स्थित माँ चण्डीदेवी के मंदिर पहुँचा। यहाँ बच्चों ने प्राकृतिक सौंदर्य के बीच स्थित मंदिर के दर्शन किए और इस स्थल की पौराणिक मान्यताओं के बारे में विस्तार से जाना साथ ही वास्तव में भालू देखकर बहुत आनंदित हुये । जिज्ञासा और संवाद भ्रमण के दौरान बच्चों की जिज्ञासा भी देखने लायक थी। ऐतिहासिक स्थलों और वहां की वास्तुकला को लेकर बच्चों ने कई प्रश्न किए, जिनका उत्तर शिक्षकों ने बड़े ही सरल और रोचक ढंग से दिया। बच्चों ने पूछा कि इन स्थलों का नाम ‘भीमखोज’ या ‘घुचापाली’ क्यों पड़ा? शिक्षकों ने ऐतिहासिक तथ्यों के माध्यम से बच्चों की हर शंका का समाधान किया, जिससे बच्चे काफी संतुष्ट और ज्ञानवर्धित महसूस कर रहे थे। हर्षोल्लास के साथ वापसीपूरे भ्रमण के दौरान बच्चों ने न केवल पढ़ाई से उत्तर व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त किया, बल्कि मनोरंजन का भी भरपूर आनंद लिया। दिलेश्वर मढरिया ने बताया कि ऐसे आयोजनों से बच्चों में अपनी संस्कृति और इतिहास के प्रति रुचि जागृत होती है। दिन भर की ज्ञानवर्धक यात्रा और ढेर सारी यादें समेटे हुए बच्चे शाम को सकुशल वापस लौटे। बच्चों के चेहरों पर इस भ्रमण की खुशी साफ झलक रही थी। क्षैक्षणिक भ्रमण के दौरान श्यासुन्दर, बिरेन्द्र सर, पंकज, दिलेश्वर मढरिया, सीमा वर्मा, मेघा उपाध्याय साथ थे.







